अमेरिका-ईरान संघर्ष: ट्रंप के बदलते तेवर और होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक तनाव का 37वां दिन

अमेरिका-ईरान संघर्ष: ट्रंप के बदलते तेवर और होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक तनाव का 37वां दिन
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संघर्ष के 37वें दिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लहजा और भी तीखा हो गया है। शुरुआत में जहां वे लगातार सैन्य कार्रवाई की बात कर रहे थे, वहीं अब उनके बयानों में आक्रामक और अपमा...

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संघर्ष के 37वें दिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लहजा और भी तीखा हो गया है। शुरुआत में जहां वे लगातार सैन्य कार्रवाई की बात कर रहे थे, वहीं अब उनके बयानों में आक्रामक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल देखा जा रहा है। इस दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।

Key points

  • डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की शुरुआत से ही लगातार सैन्य धमकियां दीं, लेकिन अब उनके बयानों में गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का प्रयोग बढ़ गया है, जिससे उनकी आलोचना हो रही है।
  • ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमले के जवाब में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया।
  • ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर जैसे अमेरिकी मित्र देशों में स्थित सैन्य ठिकानों और अमेरिकी प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया।
  • जारी संघर्ष में ईरान ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों, जिनमें F-15E भी शामिल है, को मार गिराने का दावा किया है, जिससे अमेरिकी सेना को भी नुकसान हुआ है।
  • ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए शर्तें रखी हैं, जिनमें भविष्य में हमलों की गारंटी और युद्ध से हुए नुकसान के लिए भारी मुआवजा शामिल है, जिस पर अब दो-चरणों वाले समझौते की बात चल रही है।
  • ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा "अनर्थ" होने की चेतावनी दी है।

What we know so far

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों में लगातार युद्ध और तबाही की बातें करते आ रहे हैं। संघर्ष के 37वें दिन तक आते-आते ट्रंप का लहजा काफी बदल गया है। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर किए गए पोस्ट में अब अपशब्दों का इस्तेमाल देखा जा रहा है, जिसमें ईरान को "अल्लाह से प्रार्थना करते रहने" की सलाह दी गई है। इस व्यवहार के कारण अमेरिका में ही उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस संघर्ष के बीच, ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। ट्रंप की बार-बार की धमकियों के बावजूद ईरान ने इसे खोलने से इनकार कर दिया। होर्मुज के बंद होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और एलपीजी की भी कमी हो गई। ईरानी संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारी टोल लगाने का बिल भी पारित किया है। शिपिंग डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में जहाज होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान की औपचारिक मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि ईरान ने हाल के दिनों में कुछ चुनिंदा जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है।

होर्मुज को लेकर ट्रंप के बयान भी लगातार बदलते रहे हैं। पहले उन्होंने धमकी दी, फिर कहा कि अमेरिका को होर्मुज की जरूरत नहीं है और अन्य देश इसकी सुरक्षा खुद करें। बाद में उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया कि "थोड़ा और समय मिले तो हम आसानी से होर्मुज स्ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।" अब, ट्रंप ने ईरान को होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर "अनर्थ" होगा। उन्होंने ईरान के पुलों और पावर प्लांटों को "बनाने" की भी बात कही है, जो एक अप्रत्यक्ष धमकी मानी जा रही है।

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद अपने पड़ोसी देशों को भी निशाना बनाया, जो अमेरिका के करीब माने जाते हैं या जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर सहित कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों के कार्यालयों को भी निशाना बनाया और होटलों को चेतावनी दी कि वे अमेरिकी सैनिकों को कमरे न दें, अन्यथा उन पर भी हमला किया जाएगा।

इस संघर्ष में अमेरिकी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है। 3 अप्रैल को ईरान ने एक F-15E लड़ाकू विमान मार गिराया था। ईरान ने अमेरिकी A-10 थंडर और F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमानों को भी मार गिराने का दावा किया है। कुवैत में भी अमेरिकी सेना के लड़ाकू विमान गिरे थे, हालांकि कुवैत ने इन्हें गलती से एयर डिफेंस सिस्टम की जद में आने का मामला बताया था। F-15E लड़ाकू विमान से इजेक्ट हुए पायलट को अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटों में बचा लिया था, लेकिन वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर को बचाने के लिए ट्रंप को दो सौ सैनिक और दर्जनों लड़ाकू विमानों का पूरा हवाई बेड़ा उतारना पड़ा। इस बचाव अभियान के दौरान अमेरिका के दो परिवहन विमानों में तकनीकी खराबी भी आ गई।

ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। इनमें यह गारंटी शामिल है कि उस पर फिर कभी हमला नहीं किया जाएगा और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भारी-भरकम मुआवजा दिया जाएगा। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अब दो-चरणों वाले समझौते की शर्तों पर बातचीत हो रही है, जिसमें ईरान ने अपने मध्यस्थों के माध्यम से 45 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है, ताकि इस अवधि में युद्ध समाप्ति को लेकर बातचीत हो सके।

Context and background

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को किए गए हमले ने पश्चिम एशिया में दशकों से चले आ रहे तनाव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला दिया है। यह हमला, क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताओं का परिणाम माना जा रहा है। ईरान, जो अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय शक्ति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ने इस कार्रवाई को अपनी सुरक्षा पर सीधा हमला माना है।

इस संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह संकरा मार्ग, मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। ईरान द्वारा इसे बंद करने का निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि यह कच्चे तेल की कीमतों को आसमान छूने और ऊर्जा संकट पैदा करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए इतना दबाव डाल रहा है।

ट्रंप के बयानों में आया बदलाव और उनकी मानसिक स्थिति पर उठते सवाल भी इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। एक वैश्विक नेता के रूप में, उनके शब्दों का अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आक्रामक और अपमानजनक भाषा का प्रयोग न केवल ईरान के साथ तनाव बढ़ाता है, बल्कि अमेरिका के सहयोगियों के बीच भी चिंता पैदा कर सकता है। उनके बदलते रुख, जैसे कि पहले होर्मुज की जरूरत न होने की बात कहना और फिर उसे खोलने के लिए अल्टीमेटम देना, उनकी रणनीति में स्पष्टता की कमी को दर्शाता है।

ईरान द्वारा अमेरिकी सहयोगियों और सैन्य ठिकानों पर हमला करना, इस संघर्ष के क्षेत्रीय विस्तार को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि ईरान केवल अपनी सीमाओं के भीतर ही प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं है, बल्कि वह उन देशों को भी निशाना बनाएगा जिन्हें वह अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा मानता है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों का गिरना, भले ही उसकी संख्या कम हो, अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता पर सवाल उठाता है और ईरान की रक्षा क्षमताओं को उजागर करता है। यह स्थिति क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

ईरान द्वारा युद्धविराम और मुआवजे की शर्तें रखना, यह संकेत देता है कि वह सीधे सैन्य टकराव को स्थायी समाधान नहीं मानता, बल्कि कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है, लेकिन अपनी शर्तों पर। यह भविष्य में किसी भी शांति वार्ता के लिए एक आधार प्रदान करता है, हालांकि ये शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य होंगी या नहीं, यह देखना बाकी है। कुल मिलाकर, यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच का मामला नहीं है, बल्कि इसके वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा निहितार्थ हैं।

What happens next

आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे जा सकते हैं। सबसे तात्कालिक पहलू डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम है। यदि ईरान इस अल्टीमेटम का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका की ओर से क्या प्रतिक्रिया होगी, यह देखने वाली बात होगी। ट्रंप ने "अनर्थ" और ईरान के बुनियादी ढांचे को "बनाने" जैसी बातें कहकर सैन्य कार्रवाई की संभावना को खुला रखा है।

इसके साथ ही, ईरान द्वारा प्रस्तावित 45 दिन के युद्धविराम और दो-चरणों वाले समझौते की शर्तों पर चल रही बातचीत भी महत्वपूर्ण है। यदि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो यह संघर्ष को कम करने और स्थायी शांति की दिशा में एक पहला कदम हो सकता है। यह युद्धविराम की अवधि दोनों पक्षों को बातचीत के लिए एक मंच प्रदान करेगी, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद है।

हालांकि, ईरान की शर्तें, जैसे भविष्य में हमलों की गारंटी और भारी मुआवजा, अमेरिका के लिए स्वीकार करना आसान नहीं होगा। इन शर्तों पर कूटनीतिक खींचतान जारी रहने की संभावना है। यदि बातचीत विफल हो जाती है, तो संघर्ष के और बढ़ने का खतरा बना रहेगा, जिससे पश्चिम एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या कूटनीति सैन्य टकराव को टाल पाएगी।

FAQ

  • प्रश्न: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कब किया?
    उत्तर: अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था।
  • प्रश्न: होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
    उत्तर: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इसका बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
  • प्रश्न: डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में क्या बदलाव आया है?
    उत्तर: शुरुआत में ट्रंप सैन्य कार्रवाई की बात करते थे, लेकिन अब उनके बयानों में अधिक आक्रामक और कभी-कभी अपमानजनक भाषा का प्रयोग देखा जा रहा है, जिससे उनकी आलोचना हो रही है।
  • प्रश्न: ईरान ने शांति के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
    उत्तर: ईरान ने मांग की है कि उस पर भविष्य में कोई हमला न हो और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उसे भारी मुआवजा दिया जाए।
  • प्रश्न: क्या ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया?
    उत्तर: हाँ, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर जैसे अमेरिकी मित्र देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।