संसद का बजट सत्र, जिसे पहले 2 अप्रैल को समाप्त होना था, अब 16 अप्रैल से तीन दिनों के लिए फिर से शुरू होगा। इस विस्तारित सत्र के दौरान केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून, जिसे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से भी जाना जाता है, में संशोधन के लिए विधेयक लाने की तैयारी में है। विपक्ष ने इस सत्र की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी लाभ लेने की कोशिश बताया है, खासकर जब देश के कई हिस्सों में विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू है।
मुख्य बिंदु
- संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक विस्तारित किया गया है, जिसमें केवल सरकारी कामकाज होगा।
- इस सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन और संभवतः परिसीमन कानून में बदलाव से संबंधित दो विधेयक लाए जाने की उम्मीद है।
- केंद्र सरकार का लक्ष्य 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है।
- मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्र को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए आरोप लगाया है कि यह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावी लाभ लेने के लिए बुलाया गया है।
- विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सर्वदलीय बैठक बुलाने की उनकी मांग को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा निर्णय लिया है।
- परिसीमन को लेकर संभावित बदलावों पर भी चिंता जताई जा रही है, जिससे लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि और कुछ राज्यों को नुकसान होने की आशंका है।
अब तक क्या जानकारी है
संसदीय कार्य मंत्री के अनुरोध पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की है कि संसद का बजट सत्र, जो 2 अप्रैल को अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने वाला था, अब 16 अप्रैल को फिर से बैठेगा। यह सत्र तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें 16, 17 और 18 अप्रैल शामिल हैं। इस अवधि के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल या निजी सदस्यों के विधेयकों पर कोई चर्चा नहीं होगी, बल्कि केवल सरकारी कामकाज निपटाया जाएगा। सरकार का इरादा 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करना है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही, परिसीमन कानून में बदलाव से संबंधित एक और विधेयक भी लाए जाने की चर्चा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य 2029 के आम चुनावों में इस आरक्षण को लागू करना है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहयोग की अपील की है और इसे राजनीति से परे रखने का आग्रह किया है।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में लंबे समय से लंबित रहा है। दशकों के इंतजार के बाद, सितंबर 2023 में संसद के एक विशेष सत्र के दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (संविधान का 106वां संशोधन) पारित किया गया था। इस कानून का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है। हालांकि, इस कानून को तत्काल लागू नहीं किया जा सका, क्योंकि इसके क्रियान्वयन को जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन) से जोड़ा गया था। सरकार ने तब कहा था कि नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही यह कानून प्रभावी होगा।
अब, जबकि जनगणना में अभी कुछ समय लगने की संभावना है, सरकार इस कानून को लागू करने के लिए संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। इस कदम की टाइमिंग पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने यह सत्र ऐसे समय में बुलाया है जब देश के कई राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है। आदर्श आचार संहिता एक दिशानिर्देश है जो चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर लागू किया जाता है। विपक्षी दल इसे चुनावी लाभ लेने की कोशिश बता रहे हैं, खासकर उन राज्यों में जहां महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं या जहां भाजपा का मुकाबला महिला नेताओं से है। उनका तर्क है कि चुनाव प्रचार के बीच सांसदों के लिए दिल्ली आकर सत्र में शामिल होना मुश्किल होगा।
विपक्ष ने सरकार पर इस संबंध में सर्वदलीय बैठक न बुलाने का भी आरोप लगाया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, विपक्षी दलों ने 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, जब राज्यों में मतदान समाप्त हो जाएगा, लेकिन सरकार ने एकतरफा फैसला ले लिया। परिसीमन के मुद्दे पर भी विवाद है। यह जानकारी सामने आई है कि प्रस्तावित संशोधन में लोकसभा सीटों की संख्या में 50% तक की वृद्धि हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो विपक्ष का मानना है कि दक्षिण, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के छोटे राज्यों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर कम रही है और सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जो संघीय ढांचे पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग पर भी तस्वीर साफ नहीं है, जबकि एससी/एसटी महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पहले से ही मौजूद है।
आगे क्या होगा
संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल को शुरू होगा और तीन दिनों तक चलेगा। इस दौरान सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन के लिए और संभवतः परिसीमन कानून में बदलाव से संबंधित विधेयक पेश करेगी। इन विधेयकों पर सदन में चर्चा और मतदान की उम्मीद है। यदि ये संशोधन विधेयक पारित हो जाते हैं, तो यह महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। हालांकि, विपक्ष की आपत्तियों और चुनावी माहौल को देखते हुए, सत्र के दौरान तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल सकते हैं। सरकार को इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों के सहयोग की आवश्यकता होगी, जैसा कि संसदीय कार्य मंत्री ने भी आग्रह किया है। परिसीमन से जुड़े संभावित बदलावों और उनके राज्यों पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी गहन विचार-विमर्श होने की संभावना है।
FAQ
- प्रश्न: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' क्या है?
उत्तर: यह संविधान का 106वां संशोधन है, जिसे सितंबर 2023 में पारित किया गया था। इसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है। - प्रश्न: यह कानून अब तक लागू क्यों नहीं हुआ है?
उत्तर: कानून के अनुसार, इसे नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन) के बाद ही लागू किया जाना था। - प्रश्न: संसद का यह विशेष सत्र क्यों बुलाया गया है?
उत्तर: सरकार का कहना है कि यह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए है, जिसका लक्ष्य 2029 के चुनावों से पहले आरक्षण को प्रभावी बनाना है। - प्रश्न: विपक्ष इस सत्र की टाइमिंग पर आपत्ति क्यों जता रहा है?
उत्तर: विपक्ष का आरोप है कि सत्र ऐसे समय में बुलाया गया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और आदर्श आचार संहिता लागू है, जिससे यह चुनावी लाभ लेने की कोशिश प्रतीत होती है। - प्रश्न: परिसीमन क्या है और इससे क्या चिंताएं जुड़ी हैं?
उत्तर: परिसीमन निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया है। विपक्ष को चिंता है कि प्रस्तावित बदलावों से लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, जिससे कुछ छोटे राज्यों को नुकसान हो सकता है।